- Gen Z को Great Generation बनाने के लिए नशामुक्त जीवन जरूरी : डॉ. ए.के. द्विवेदी
- LPU's Future-Ready B.Tech Ecosystem Powers Record Placements with Industry-Ready Talent
- ग्रीनप्लाई ने लॉन्च की टर्मीवैक्स - प्लाईवुड के लिए भारत की पहली एंटी-टर्माइट वैक्सीनेटेड तकनीक
- Greenply Launches Termivax, India's First Anti-Termite Vaccinated Technology in Plywood
- Varun Sood Backs Best Friend Harman Singha Ahead of The Traitors Season 2: You've got this! Go kill it, Harman!
2022 लेकर आ रहा है बुंदेलखंड के लिये नया सवेरा
अपनी तरह की प्रथम नदी जोड़ो’ केन-बेतवा’ परियोजना ने सूखे बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए काफ़ी उम्मीदें जगायी है, विशेषज्ञ और नागरिक इसे क्षेत्र के विका सके मद्दे नजर एक नई सुबह के रूप में देख रहे हैं।
बुंदेलखंड क्षेत्र में कुल 13 जिले हैं जिनमें से उत्तरप्रदेश में 7 जिले और मध्य प्रदेश में 6 जिले हैं। 2018 में प्रकाशित नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार देश के 115 आकांक्षी जिलों की सूची में इनमे से बुंदेलखंड के 3 जिले शामिल हैं। मध्यप्रदेश का बुंदेलखंड उत्तरी मध्यम ऊँचाई वाला क्षेत्र पहाड़ी भाग है और इसकी अधिकांश भूमिक बंजर और अनुपयोगी है । दूसरी तरफ बुंदेलखंड पानी तथा औद्योगिक विकास की कमी,बेरोजगारी और कृषि संकट से जूझता आया है।
केन-बेतवा नदी जोड़ ने की परियोजना से बुंदेलखंड में हालात उबरनेवाले हैं। यह महत्वकांक्षी परियोजना न केवल बारहमासी सूखा प्रभावित क्षेत्र को पानी पहुंचाए गीबल्किसमृद्धि और विकास केन एरास्ते भी खोलेगी ।केन-बेतवा को जोड़ने की परियोजना ने स्थानीय लोगों में उम्मीद जगाई है कि केंद्र और राज्य सरकार इस क्षेत्र की प्रगति और विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं।केन-बेतवा नदी जोड़ने की परियोजना देश की पहली राष्ट्रीय परियोजना है जो राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना के तहत आकार ले रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पहली बार पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल के दौरान प्रस्तावित किया गया था।
बुंदेलखंड में ऐसे सारे क्षेत्र जिन पर सरकार का जोर है जैसे,कौशल विकास, पर्यटन, उद्योग, बुनियादी सेवाएं और कृषि इत्यादि में नये आयाम जुड़ेंगे।बुंदेलखंड क्षेत्र की आने वाली परियोजनाओं से मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के छहजिलों- दतिया, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, दमोह और सागर के परिदृश्य में अभूत पूर्व परिवर्तन आएगा।
44,605 करोड़ रुपये लागत की इस परियोजना से राज्य के छतरपुर, पन्ना, टीकमगढ़, निवाड़ी, दमोह, सागर, दतिया, शिवपुरी, विदिशा और राय सेन जिलों को लाभ होगा । इसके साथ-साथ, इस परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल आपूर्ति, और 103 मेगावाट पन बिजली और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पन्न होने की उम्मीद है।
केन-बेतवा परियोजना जहां एक सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजना है वहीं सार्वजनिक-निजी भागीदारी की एक और ऐतिहासिक परियोजना बुंदेलखंड की कहानी बदलने को तैयार है।वह है छतरपुर जिले के बक्सवाहा में स्थित बंदर हीरा परियोजना।बंदर हीरा परियोजना के रूप में देश में लगभग 50 सालों के बाद हीरों की खोज हुई है और इसके शुरू होने पर बुंदेलखंड को वैश्विक मंच पर एक नयी पहचान मिलेगी।
यह परियोजना, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान कर ने के अलावा, सरकारी खजाने में 28,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देने और क्षेत्र में लगभग 40,000 करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों का संचालन कर ने में मदद करेगी । इसके अलावा, यह परियोजना कौशल केंद्रों को विकसित करने में मदद करेगी और हीरा उद्योग से जुड़े मिड-स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम उद्यमिता के नए अवसर प्रदान करेगी जो इस क्षेत्र को विश्व स्तर पर शीर्ष 10 हीरा उत्पादक स्थलों में से एक में बदल सकते हैं।
लेकिन अन्य प्रमुख बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं की तरह ही पर्यावरण और पारिस्थिति की पर प्रभाव को लेकर यहाँ भी प्रतिवाद और बहस है।यह एक सर्व विदित तथ्य है कि औद्योगिक और घरेलू उद्देश्यों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का नियोजित, प्रभावी और कुशल उपयोग और सतत विकास प्रथाओं को अपनाने से न केवल प्रभाव कम हो सकता है बल्कि विकास और पारिस्थिति की को भी संतुलित किया जा सकता है।
प्रदर्शनकारियों को गंभीरता से सोचने की जरूरत है।क्या हम उम्मीद कर सकते हैं कि वर्तमान और भावी पीढ़ियां गरीबी और संकट ग्रस्त प्रवास में जीवन व्यतीत करती रहेंगी ? उन्हें प्रगति के किसी भी फल से वंचित क्यों रखा जाए ? चाहे नदियों को जोड़ने की बात हो या हीरा खनन परियोजना की, इस क्षेत्र में बदलाव की आहट सुनायी देने लगी है और वर्ष 2022 एक नया सवेरा ला सकता है जिसका इस क्षेत्र को बेसब्री से इंतजार है।


